रुत शिवरात्रि दी आई है

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

रुत शिवरात्रि दी आई होई ए

मेरे भोले ने भंग चढ़ाई होई ए

आज पा लो भंगड़े गली गली

इस भंगड़े में गणपति आए

रिद्धि सिद्धि नू नाल लयाए

आज पा लो भंगड़े जय हो गली गली

रुत शिवरात्रि दी आई होई ए

मेरे भोले ने भंग चढ़ाई होई ए

आज पा लो भंगड़े गली गली

इस भंगड़े में ब्रह्मा जी आए

ब्रह्माणी नू नाल लयाए

आज पा लो भंगड़े गली गली

जय जय जयओ भोले

रुत शिवरात्रि दी आई होई ए

मेरे भोले ने भंग चढ़ाई होई ए

आज पा लो भंगड़े गली गली

इस भंगड़े में विष्णु आए

लक्ष्मी जी नू नाल लयाए

आज पा लो भंगड़ा गली गली,

रुत शिवरात्रि दी आई होई ए

मेरे भोले ने भंग चढ़ाई होई ए

आज पा लो भंगड़े गली गली

इस भंगड़े विच राम जी आए

सीता मां नू नाल लयाए

आज पा लो भंगड़ा गली गली

रुत शिवरात्रि दी आई होई ए

मेरे भोले ने भंग चढ़ाई होई ए

आज पा लो भंगड़े गली गली

इस भंगड़े में श्याम जी आए

राधा रानी नू नाल लयाए

आज पा लो भंगड़े गली गली

रुत शिवरात्रि दी आई होई ए

मेरे भोले ने भंग चढ़ाई होई ए

आज पा लो भंगड़े गली गली

इस भंगड़े में संगत आई

ढोलक चिमटा नाल लयाई

आज पा लो भंगड़े गली गली

रुत शिवरात्रि दी आई होई ए

मेरे भोले ने भंग चढ़ाई होई ए

आज पा लो भंगड़े गली गली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।