मंदिर में रहते हो

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मंदिर में रहते हो भगवन कभी बहार भी आया जाया करो,

मैं रोज तेरे दर आता हु कभी तुम भी मेरे घर आया करो,

मैं दीन हु दीनाथ हो तुम,

दुःख सुख में सबके साथ हो तुम,

फिर क्यों न सुनो मेरे दिल की,

इतना न जुलम गवाया करो

मैं रोज तेरे दर आता हु.........

बेहाल तेरे दर आते है,

तुम को दुःख दर्द सुनते है,

सुनते हो सभी का हाल मगर,

आपना भी हाल सुनाया करो,

मैं रोज तेरे दर आता हु......

जग के दाता कहलाते हो,

ना पीते हो ना खाते हो ,

अब गये परषद तेरा गुण भी कुछ पीया करो कुछ खाया करो,

मैं रोज तेरे दर आता हु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।