काशी से आई है बारात गौरा जी के, अंगना में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

काशी से आई है बारात

काशी, से आई है बारात, गौरा जी के, अंगना में ॥

ओ गौरा जी के, अंगना में, ओ गौरा जी के, अंगना में ॥

दूल्हा, बने हैं भोलेनाथ, गौरा जी के, अंगना में ।

काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

विष्णु, जी आए, शिव को, सजाए ।

मुंडों, की माला, गले पहनाए ॥

माथे पे, सजाए चाँद, गौरा जी के, अंगना में...

काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

ब्रह्मा, जी आए, मंडप सजाए ।

शिव, गौरा की, शादी कराए ॥

लगन लिखा रहे आज, गौरा जी के, अंगना में...

काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

अवध, पुरी से, राम जी आए ।

गौरा, माँ की, डोली सजाए ॥

सीता जी, करे श्रृंगार, गौरा जी के, अंगना में...

काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

गोकुल, नगरी से, कान्हा जी आए ।

कान्हा, जी आए, मुरली बजाए ॥

राधा जी, गाए मंगल गान, गौरा जी के अंगना में...

काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

सूरज, चंदा, बन ठन आए ।

बनके, बाराती, धूम मचाए ॥

झूम, रहा आकाश, गौरा जी के, अंगना में...

काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

सृष्टि, का, कण कण हर्षाए ।

शिव, गौरां का, मन मुस्काए ॥

भक्त जन, करें जय जयकार, गौरा जी के, अंगना में...

काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

धुन- बम बम, भोले... महाँ देवा,

महाँ देवा, बम बम, भोले ॥

जय शंकर, कैलाश पति,

जय गौरां, जय पार्बती ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।