जगराता दाती दा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भवन बना के जोत जगा के मां दे जयकारे लो

आज है जगराता दाती दा सारे नाच नाच खुशी मनाओ

वाला रानी जोता दे विच दर्शन दैन नू आई

चोली आगे कर लो भक्तों खैर मां वर्डन आई

आओ मेरी मां दे दर ते सुते भाग जगाओ ... आज है ...

भागा वाली रात है आई भगता ने जगन रचाया

शेर सवारी करके आई जग जननी महामाया

दिल ना किसे दा तोड़े दाती मन दी मुरादे पाओ, आज है जगराता

बचाया दे घर मेहरा करदी मां शेरावाली

नाच नाच के सारे खुशी मनाओ नाले बजाओ ताली

चरणा दे विच लगा के R,K शिवम दे संग गुण गाओ ,आज है जगराता...

Lyricist :- Shivam rajput

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।