राधारमण रंगीले ठाकुर तुम हो रसिकन के सिरताज

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधारमण रंगीले ठाकुर,

तुम हो रसिकों के सिरताज,

रसिकों के सिरताज,

तुम हो राखो सबकी लाज,

राधारमण रंगीले.....

मोर मुकुट की छवि निराली,

हाथ बांसुरिया है मतवाली,

कमर पे करधनी लटक रही तेरे,

सिर पे सोहे ताज,

राधारमण रंगीले...........

पीताम्बर पट पीत बिराजे,

गल बैजन्ती माला साजे,

ठुमक ठुमक के जब चलत हो,

पग नुपुर रही बाज,

राधारमण रंगीले...........

तरह तरह के पहरों पटके,

जो दर्शन करें तुमपर अटके,

दीनो के हो सदा सहाई,

तुम हो गरीब निवाज ,

राधारमण रंगीले...........

राधा संग दिल में बस जाओ,

चरणों की मुझे दासी बनाओ,

हाथ पकड़ लो मेरा प्यारे,

बिगड़े संवारो काज,

राधारमण रंगीले...........

अंशु गिरी कोटकपूरा पंजाब

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।