मन में हो सुमिरन एक तेरा लाडली

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॥ पावन पाठ ॥

मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली ,

बीते यू जीवन यह मेरा लाड़ली,

बस इतनी तमन्ना है बस इतना कहना है,

मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली

बीते यू जीवन बस मेरा लाडली ॥

जब भी मुख में खोलूं श्री राधे राधे बोलूं

प्रेम सुधा रस अमृत को घोलू

अमृत को पीना है मस्ती से जीना है

मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली ,

बीते यू जीवन यह मेरा लाडली ॥

राधे राधे राधे का सुमिरन चलेगा

आठों पहर इसका चिन्तन रहेगा

चाहे सुबह सवेरा हो, चाहे सांझ अंधेरा

हो मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली ,

बीते यू जीवन यह मेरा लाडली ॥

सुनते हैं राधे सहारा बनती हो,

डुबते हुए का किनारा बनती हो

भव पार मुझे करना

मेरे पापों को हरना

मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली ,

बीते यू जीवन यह मेरा लाडली॥

चाहें जो समझना ये मन तेरा हो गया

सुमिरन की मस्ती में मन मेरा खो गया

श्री सर्वेश्वर मण्डल,

करता विनती हर पल ,

मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली ,

बीते यू जीवन बस मेरा लाडली ॥

भजन भाव रचयिता

मोहन प्रकाश काबरा, किशनगढ़

श्री राधासर्वेश्वर संकीर्तन मंडल , किशनगढ़

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।