आजा रे कन्हैया आजा रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आजा रे कन्हैया आजा रे

मेरे, मन की, शहनाई, रो रो के, तुझे पुकारे x॥

( आजा, रे कन्हैया, आजा रे x॥) ॥

कभी ये, बजा करती थी, अपनी ही धुन में ।

खिलते थे, फूल मेरे, मन उपवन में ॥

सुर भी, आज पड़े हैं मध्यम, ये सारे के सारे x॥

( आजा, रे कन्हैया, आजा रे x॥)

मेरे मन की शहनाई, रो रोकर, तुझे...

आज, बज रही है ये तो, जग के इशारो पे ।

तुझ पर, असर नहीं होगा, इसकी पुकारों से ॥

कोई, ख़ुशी के, कोई गम के, करता इसे ईशारे x॥

( आजा, रे कन्हैया, आजा रे x॥)

मेरे मन की शहनाई, रो रोकर, तुझे...

गाती, रही है ये तो, गीत बेबसी के ।

गाएगी, कब ये मोहन, गीत ख़ुशी के ॥

बाट उडीके, तेरी संजू, हर दिन साँझ सकारे x॥

( आजा, रे कन्हैया, आजा रे x॥)

मेरे मन की शहनाई, रो रोकर, तुझे...

हर हर महाँदेव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।