भोले ये दुनिया मतलब की

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले ये दुनिया मतलब की

भोले... ये दुनियाँ, मतलब की,

बिन मतलब, अपना कोई नहीं।

उड़, जा रे, पंछी स्वर्ग लोक,

दुनियाँ में, अपना, कोई नहीं ।

भोले... ये दुनियाँ, मतलब...

जब, भीड़, पड़ी थी मीरा मे।

मीरा का, साथी कोई नहीं।

हो प्याले पे, आ गए बनवारी,

बिना मतलब, अपना कोई नहीं।

भोले... ये दुनियाँ, मतलब...

जब, भीड़, पड़ी थी द्रोपद पे ।

द्रोपद, का साथी, कोई नहीं ॥

हो साड़ी... पे आ गए, बनवारी,

बिना मतलब, अपना कोई नहीं।

भोले... ये दुनियाँ, मतलब...

जब, भीड़, पड़ी थी, नरसी पे ।

नरसी, का साथी, कोई नहीं ॥

हो पटड़े... पे आ गए, बनवारी,

बिना मतलब, अपना कोई नहीं।

भोले... ये दुनियाँ, मतलब...

जब, भीड़, पड़ी थी, पह्रलाद पे ।

पह्रलाद, का साथी, कोई नहीं।

हो खम्भे... मे आ गए, बनवारी,

बिना मतलब, अपना कोई नहीं।

भोले... ये दुनियाँ, मतलब...

जब, भीड़, पड़ी थी भगतों पे ।

भगतों, का साथी, कोई नहीं ॥

हो कीर्तन... मे आ गए, बनवारी

बिना मतलब, अपना कोई नहीं।

भोले... ये दुनियाँ, मतलब...

हर हर महाँदेव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।