तूने लाखों की बिगड़ी बनाई रे

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तूने लाखों की बिगड़ी बनाई रे

तूने, लाखों की, बिगड़ी बनाई रे,

तेरी, जय हो, कालका माई रे ॥

तेरी, जय हो, कालका माई रे,

तेरी, जय हो, कालका माई रे ।

तूने, लाखों की, बिगड़ी...

तूने, गणपत की बनाई,

तूने, भोले की बनाई ॥

तूँ तो, गौरा, रूप में, आई रे,

तेरी, जय हो, कालका माई रे ।

तूने, लाखों की, बिगड़ी...

तूने, ब्रह्मा की बनाई,

तूने, विष्णु की बनाई ॥

तूँ तो, लक्ष्मी, रूप में, आई रे,

तेरी, जय हो, कालका माई रे ।

तूने, लाखों की, बिगड़ी...

तूने, राम की बनाई,

तूने, हनुमत की बनाई ॥

तूँ तो, सीता, रूप में, आई रे,

तेरी, जय हो, कालका माई रे ।

तूने, लाखों की, बिगड़ी...

तूने, कान्हा की बनाई,

तूने, दाऊ की बनाई ॥

तूँ तो, राधा, रूप में, आई रे,

तेरी, जय हो, कालका माई रे ।

तूने, लाखों की, बिगड़ी...

तूने, बेटे की बनाई,

तूने, बेटी की बनाई ॥

तूँ तो, मईया, रूप में, आई रे,

तेरी, जय हो, कालका माई रे ।

तूने, लाखों की, बिगड़ी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।