चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में,

कैसी छाई हरियाली आज कुजंन में

चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में....

शीतल मन्द सुगंध युत,चल रही त्रिविध समीर

तुम हूँ पधारो रास में,हरिये जन मन पीर

प्रेम बांवरे बने री तेरे दर्शंन में,चलो

चलो री किशोरी वृन्दावन में

चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में,

कैसी छाई हरियाली आज कुंजन में

चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में....

चमक चन्द्रं की चांदनी,मौं मन रही लुभाये

मत देखो या चन्द्र को,कहीं दे ना दीठ लगाये

आज दियो ना दिठौना गौरे आनंन में,

चलो चलो री वृन्दावन में

चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में,

कैसी छाई हरियाली आज कुजंन में

चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में....

शुक-पिक-खजंन द्रुमंन चढ़ी,चहक रहे हरषाये

मन हूँ रास रस निरखै वै,प्रेमी रहे दुराये

प्रेम बांवरे बनेंगे तेरे दर्शन में,

चलो चलो किशोरी वृन्दावन में

चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में,

कैसी छाई हरियाली आज कुजंन में

चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में....

बाबा धसका पागल पानीपत

‌ संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।