ओ कान्हा रे तेरे बिना भी क्या जीना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ कान्हा रे, तेरे बिना भी क्या जीना,

तेरे बिना भी क्या जीना,

फूलों में कलियों में , वृंदावन की गलियों में ,

तेरे बिना कुछ कहीं ना , तेरे बिना भी क्या जीना,

तेरे बिना भी क्या जीना,

जाने कैसे अनजाने ही, आन बसे मेरे मन में,

अपना सब कुछ खो बैठा मैं ,जब से बसे मेरे दिल में,

भक्ति के अफसाने, मैं जानू तू जाने , और ये जाने कोई ना,

तेरे बिना भी क्या जीना,

तेरे बिना भी क्या जीना,

मेरी धड़कन में बसे हो, सांसों में तेरी खुशबू है,

इस धरती से उस अंबर तक, मेरी नजर में तू ही तू है,

भक्ति ये छूटे ना , तू मुझसे रूठे ना, साथ ये छूटे कभी ना,

तेरे बिना भी क्या जीना,

तेरे बिना भी क्या जीना,

तुम बिन सुना मेरा जीवन , तुम बिन सुने दिन ये सारे,

मेरा जीवन तुझको अर्पण, तुम ही हो जीने के सहारे,

तेरे बिना मेरी ,मेरे बिना तेरी , ये जिंदगी जिंदगी ना,

तेरे बिना भी क्या जीना,

तेरे बिना भी क्या जीना,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।