साईं तेरे चरणों की अगर धुल जो मिल जाए

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा तेरे चरणों की, साईं तेरे चरणों की ।

अगर धुल जो मिल जाए, सच कहता हु बस अपनी तक़दीर बदल जाए ॥

सुनते हैं तेरे रहमत दिन रात बरसती हैं ।

इस दया के सागर से एक बूंद जो मिल जाए ॥

ये मन बड़ा चंचल है इसे कैसे मैं समझाऊं ।

जितना इसे समझाऊं उतना ही मचल जाए ॥

नजरो से गिरना ना, चाहे जो सजा देना ।

नजरो से जो गिर जाए मुश्किल वो संभल पाए ॥

बस एक तमना है तुम सामने हो मेरे ।

तुम सामने हो मेरे, मेरा दम ही निकल जाए ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।