न जाना छोड़ के लक्ष्मण हमें तुम

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

न जाना छोड़ के लक्ष्मण

धुन- अकेले हैं चले आओ

न जाना, छोड़ के लक्ष्मण, हमें तुम ॥

न, सह पाएंगे, हम भाई, तेरा ग़म...

न जाना, छोड़ के लक्ष्मण...

है सीता, की ज़ुदाई, दुखी हूँ मेरे भाई ॥

जो तूँ भी, चल दिया तो, बड़ी, होगी तबाही...

न जाना, छोड़ के लक्ष्मण...

हुआ, बनवास मुझको, तूँ मेरे साथ था आया ॥

भाई, होने का लक्ष्मण, जो तूने, फ़र्ज़ निभाया...

न जाना, छोड़ के लक्ष्मण...

जाओ, हनुमान जाओ, जाओ संजीवनी लाओ ॥

मेरे, भाई लखन की, जल्दी से, जान बचाओ...

न जाना, छोड़ के लक्ष्मण...

सीता को, साथ लेकर, अयोध्या पूरी है जाना ॥

जो तूने, दम अगर तोडा, तो रोएगा, यह ज़माना...

न जाना, छोड़ के लक्ष्मण...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।