ल्याया थारी चनुड़ी

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज: ल्याया थारी चनुड़ी

ल्याया मैया पालकी, ले जाने थाने साथ

थाने मन मंदिर म राखा, थे चालो माहरे साथ ||

टाबरिया न राह दिखाजो, सागे थे चल चालो माँ

जीवन की या राह कठिन है, साथी थे बन जाओ माँ

स्वीकारो माँ या विनती, ओर थामो माहरा हाथ || ल्याया दादी ...

अंख्या से यू नीर झरत ह, थारा दर्शन पाणे माँ

मोह माया में यू उल्झ्या हा, रोज़ आ ना पावा माँ

लेजावन आया मैया, थे चालो माहरे साथ || ल्याया दादी ...

म्हे बैठ्या थारी बाट उडिका, उवार बोली होगी माँ

कद चलोगा माहरे सागे, इतनो थे बतलाओ माँ

थाने पलका माही बैठास्या,

थाने हिवडे माही रामास्या, थे बैठो पलाकी माय || ल्याया दादी ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।