मेरा भोला बड़ा भंगिया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरा भोला बड़ा भंगिया

मेरा, भोला बड़ा, भंगिया... ओ राम जी ॥

ओ जटा, धारी बड़ा, अमली... ओ राम जी ॥

ओ, राम जी, ओ राम जी ॥

मेरा, भोला बड़ा, भंगिया...

मैंने, मंगाया, माथे का टीका ॥

ओ भोला, चंदा, ले के आ गया... ओ राम जी ॥

मेरा, भोला बड़ा, भंगिया...

मैंने, मंगाए, कानों के कुंडल ॥

ओ भोला, बिच्छू, ले के आ गया... ओ राम जी ॥

मेरा, भोला बड़ा, भंगिया...

मैंने, मंगाया, गले का हार ॥

ओ भोला, सर्प, ले के आ गया... ओ राम जी ॥

मेरा, भोला बड़ा, भंगिया...

मैंने, मंगाई, अंगे की साड़ी ॥

ओ भोला, बाघंबर, ले के आ गया... ओ राम जी ॥

मेरा, भोला बड़ा, भंगिया...

मैंने, मंगाए, हाथों के कँगना ॥

ओ भोला, डमरू, ले के आ गया... ओ राम जी ॥

मेरा, भोला बड़ा, भंगिया...

मैंने, मंगाई, पैरों की पायल ॥

ओ भोला, घुँघरू, ले के आ गया... ओ राम जी ॥

मेरा, भोला बड़ा, भंगिया...

मैंने, मंगाए, लड्डू और पेड़े ॥

ओ भोला, भाँग, ले के आ गया... ओ राम जी ॥

मेरा, भोला बड़ा, भंगिया...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।