किसे गल दा ना करिए

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॥ पावन पाठ ॥

किसे गल दा ना करिए घुमान मित्रो,

जिंद अपनी न अपना जहान मित्रो,

कोई दावा चलना ना ते न दलील चलनी,

छड जाना एवे तन दा माकन मित्रो,

खाली हाथी आये बन मेहमान मित्रो,

जिंद अपनी न अपना जहान मित्रो,

वध खंजरा तो वार हुंदा लफ्जा दा,

कदे करिये न कडवी जुबान मित्रो,

हर दम एहे रखिये ध्यान मित्रो,

जिंद अपनी न अपना जहान मित्रो,

दाता भगत लिहाज कदे करदानही,

जुल दए जदो समय दा तूफ़ान मित्रो,

हर दम एहे रखिये ध्यान मित्रो,

जिंद अपनी न अपना जहान मित्रो,

हर वेले रब नु जो याद रखदे बनके ओ रहंदे तारे हर अख दे,

निवे होके साहिल जेह्दे गुजारा करदे रब रखदा सदा ओहना दी शान मित्रो,

हर दम एहे रखिये ध्यान मित्रो,

जिंद अपनी न अपना जहान मित्रो,

कोई दावा चलना ना ते न दलील चलनी,

छड जाना एवे तन दा माकन मित्रो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।