मात मेरी चिंतापूर्णि

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैनु कदे ना ना करदी मात मेरी चिंतापूर्णी

मेरे सारे काम कर दी मात मेरी चिंतापूर्णी

1) ओखे वेले आके मेरे नाल खड़दी

डूबन ना देवे मेरी बाह फड़दी।

मेरे वैरियां नाल लड़दी, मात मेरी चिंतापूर्णी।

2) दुख तकलीफ़ कोई रहन ना दवे

चिंता मेरे घर विच आन ना देवे

मैनू रहमता नाल परदी मात मेरी चिंतापूर्णी

3) शिवम गरीब मालोंमाल किता एए

जोगिया वी अपना निहाल किता एए

साढ़े सर छां कर दी मात मेरी चिंतापूर्णी

भजन गायक (शिवम राजपूत)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।