कन्हैया सांवरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुरली बजैया कन्हैया सांवरा , दिल ये दिवाना है तेरे नाम का 2

भंवर बीच नैया डोल रही है , तू आके कन्हैया पार लगाना

दीवाना , मुरली बजैया कन्हैया सांवरा , दिल ये दिवाना है तेरे नाम का

वो माखन चुराना , दही मिश्री खाना , है आदत पुरानी तेरी

गुलेल चलाना हमें यूं सताना , है आदत पुरानी तेरी

फिर भी है कान्हा तू दिल में बसा , है दिल में हर पल तेरा ही नशा

नटखट निराली कहानी तेरी , दिल ये दिवाना है तेरे नाम का 2

भंवर बीच नैया डोल रही है , तू आके कन्हैया पार लगाना

वो गोकुल की गलियां वो राधा वो सखियां , के सब हैं दिवानी तेरी

आ बंशी सुनाने झलक तो दिखादे , ये अंखियां हैं प्यासी मेरी

तुझको नजर में छुपा लूंगा मैं , अपने गले से लगा लूंगा मैं

मोहन मुरारी बनवारी , केशव माधव गिरिधारी

भंवर बीच नैया डोल रही है , तू आके कन्हैया पार लगाना

दीवाना , मुरली बजैया कन्हैया सांवरा , दिल ये दिवाना है तेरे नाम का

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।