विश्व में शांति रहेगी योग से

स्वामी अभेदानन्दजी ।
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - दिल के अरमां आंसुओं में बह गए ।

विश्व में शान्ति रहेगी योग से 2

मन की भी ज्योति जगेगी योग से ॥

आप का अभ्यास जब बढ़ जाएगा 2

ध्यान की शक्ति बढ़ेगी योग से ॥

विश्व में शान्ति रहेगी योग से ॥

धीरे-धीरे क्षुद्रता हट जाएगी 2

ज्ञान की गरिमा मिलेगी योग से ॥2

विश्व में शान्ति रहेगी योग से ||

जो ग्रहों की चाल को भी दे बदल 2

ऐसी शक्ति भी बनेगी योग से 2

विश्व में शान्ति रहेगी योग से ॥

जीते जी ही मुक्त हो सकते हो तुम ।2

देख लो तुम भी करिश्मा योग से 2

विश्व में शान्ति रहेगी योग से 2

रचना- स्वामी अभेदानन्दजी ।

स्वर- हरेकृष्ण हरि

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।