इक है श्याम प्यारे मेरे इक सालासर वाले मुझको मेरे दोनों बाबा बेटे जैसे पाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( तर्ज - धर्मवीर की जोड़ी )

इक है श्याम प्यारे मेरे इक सालासर वाले

मुझको मेरे दोनों बाबा बेटे जैसे पाले

श्याम प्यारे - श्याम प्यारे...

ज़ब से बने बाबा मेरे यार है

इनके भरोसे मेरा परिवार है

मैं तो बनकर रहूं पुजारी

बाबा ने विपदा टारी

बंद पड़ी किस्मत के खोले ताले

मुझको मेरे दोनों बाबा बेटे जैसे पाले ...

तीन लोक मे ऐसा ना दातार कोई

तुम जैसा ना देता है प्यार कोई

मेरे श्याम ने मुझको तारा

हारे को दिया सहारा

देख भगत की टोली बाबा तू ही आप संभाले

मुझको मेरे दोनों बाबा बेटे जैसे पाले ...

मनीष को विश्वास ये पूरा होता है

लकी क्यों आंखों को तू भिगोता है

मेरे बाबा है दाता री

लीले की करते सवारी

पड़े हुई को बाबा अपने पलकों पर बैठा ले

मुझको मेरे दोनों बाबा बेटे जैसे पाले ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।