आई मिलन दी रात मैया नु

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आई मिलन दी रात मैया नु आई मिलन दी रात,

ढोल उते ढगा जलादे ढ़ोलीया सहनु नाचदिया नु होनी परवाह,

आई मिलन दी रात..

तेरे दर तेरे नूर माँ वरदा अन मिनिया अन तुला,

चारे पासे महक खिलारे हवा दा हर एक भुला,

फुला ने सुदंधा वी हवा च गोलियां माँ दे रंगा विच रंगी हर बात,

आई मिलन दी रात.......

कीने लोक इकठे होक तेरी महिमा गौन दे,

बदल तेरा चिंतन करदे अमृत ने वरसोंधे,

आज खुश होई महारानी भोली आ ,

होनी रेहमता दी आज बरसात,

आई मिलन दी रात......

पालियां वालियां हैप्पी दे पिंड माँ तू लाइया लेहरा,

मिल के तेनु अरजा करदे विकर्म नु पा खेरा,

आस लाके बेठे सारे आड़ झोलियाँ देदे मुहो मंगियाँ सबना नु बात,

आई मिलन दी रात

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।