बाबा तही जाने गा तोर महिमा

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा तही जाने गा तोर महिमा ॥

कइसे काटे अकेल्ला छः महीना ।

ये बाबा सत म होके लीन,सतनाम जाबे रात दिन

घंगोर जंगल झाड़ी,उही छाता पहाड़ ।

बघवा भालू के बसेरा,मारे दहाड़ ।

गरजत घूमरत बादर,बरसे पानी के धार ।

न तो तोला डर लागे नातो तोला जाङ ।

ये गुरु काल देखे तोला डरयना ॥

सतनाम के ज्योत जलयना ॥

ये बाबा सत म होके लीन,सतनाम जाबे रात दिन

अटल तपसिया करे रखे बिश्वास

पुरुष पिता कहे जागव गुरु घासीदास

कहे तोर चरन म हवय अमृत ज्ञान

दुःखिया के दुख हरबे, जग के करबे कल्यान

ये गुरु हंसा ल तार दियेना ॥

ज़ब नाम के सुमरन कियेन ॥

ये गुरु सत म होके लीन,सतनाम जाबे रात दिन

ये चंदा सुरुज के बाबा मिले पारकाश

झूम जाये रुख राई धरती आगास

जोख नदि के पानी लहर लहरावाय

सब जीव जंतु बाबा माथ नावावय

तोरपांव के परे हवय चिन्हा ॥

छत्तीसगढ़ के पावन माटी म ॥

ये बाबा सत म होके लीन,सतनाम जाबे रात दिन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।