उही जाने महिमा ल तोर

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

उही जाने महिमा ल तोर सतगुरु बाबा ॥

जेहा मन से भजन करेय हो ॥

मोर गुरु बाबा.. उही जाने महिमा तोर ॥

पूजा तोरे भक्ति मोरे भक्ति म भगवान,

गरीब ह अमीर बनगे पाके तोर नाव ॥

तो उही जाने महिमा ल तोर

सूबा शाम सुमिरन कर जोर ॥

मोर गुरु बाबा.. उही जाने महिमा ल तोर

तोर नाम के बदना कोनो रइथे जी उपास,

मनके मनौती पूरा पाके शरधा अउ बिश्वास ॥

तो उही जाने महिमा ल तोर

जे सतनाम साधे सुरती के डोर ॥

मोर गुरु बाबा.. उही जाने महिमा ल तोर

तोर चरन म कतको आथे लाखो अउ हजार,

कतको भुइया नापत गुरु, खाड़े तोर दुवार ॥

तो उही जाने महिमा ल तोर

जेकर हिर्दय उठे भाव बिहोर ॥

मोर गुरु बाबा.. उही जाने महिमा ल तोर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।