हे लाडली मुझको भुल ना जाना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरज़-परदेसीयों से ना अख़िंयां मिलाना

हे लाडली मुझको भूल ना जाना,

करके दया की दृष्टि वापस बुलाना

हे लाडली मुझको भूल ना जाना...

जैसी भी हूं श्यामा मैं तो,मैं तो हूं तेरी

फिर क्यों लगाई लाडो,मिलने में देरी

सबपे करी है करुणा,मोपे भी लुटाना

हे लाडली मुझको भूल ना जाना,

करके दया की दृष्टि वापस बुलाना

हे लाडली मुझको भूल ना जाना...

टुकड़ों पे तेरे मेरा,जीवन पले हैं

इसी आस पर मेरी,ज़िन्दगी चले है

मिलेगा मुझे भी एक दिन,वास बरसाना

हे लाडली मुझको भूल ना जाना,

करके दया की दृष्टि वापस बुलाना

हे लाडली मुझको भूल ना जाना...

दूर क्यों बसाया मुझको,मेरी क्या ख़ता है

कुछ तो बताओ तुमको,सब ही पता है

जैसे भी रखना मुझको,ना नज़रें हटाना

हे लाडली मुझको भूल ना जाना,

करके कृपा की दृष्टि वापस बुलाना

हे लाडली मुझको भूल न जाना...

सहमीं फिरे हरिदास,आंसु बहाये

बृज़ के बाहर कहीं सांसें,छुट ही ना जाये

रेत का घरौंदा मेरा,तुम ही बचाना

हे लाडली मुझको भुल ना जाना,

करके दया की दृष्टि वापस बुलाना

हे लाडली मुझको यहीं पे बसाना

हे लाडली मुझको भुल ना जाना...

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।