मुझे लेके चलो न मैया जी के मेले में

- अंकुर सुनील
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॥ पावन पाठ ॥

दुनिया के अलबेले में

दीवानो के रेले में

देखो देखो मुझे छोर न देना

में रोऊंगा अकेले में

मुझे लेके चलो न

मैया जी के मेले में

मैया तेरी याद सताये

एक पल मुझको चैन न आये

मुझको भी मैया दर पे बुला लो

दुनिया मुझको रास न आये

जी घबराये दुनिया के झमेले में झमेले में

मुझे लेके चलो न

मैया जी के मेले में

मैया सबके कष्ट मिटाओ

मुझको भी तुम दर पे बुलाओ

दर पे मा दीवाने खड़े हैं

सबको मैया दरश दिखाओ

भक्त तुम्हारे तुझको पुकारे अकेले में अकेले में

मुझे लेके चलो न

कहता है माँ हर दीवाना

हम सब को माँ दे दो ठिकाना

इतनी कृपा तुम करना मैया

मेरे घर भी आना जाना

हार गया हूं अब इस दुनिया के इस खेले में

मुझे लेके चलो न

अंकुर और सुनील भी मैया

तुम्हरे मेले में आये

श्रद्धा से अविनाश भी मैया

नर्मदे हर हर गुण गाये

जाओ दीवानो माँ से कहना मेले में

मुझे लेके चलो न

गायक :- अविनाश झनकार

लेखक :- अंकुर सुनील

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।