ओ पापी मन करले भजन- नया संस्करण

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ओ पापी मन करले भजन

ओ पापी मन, करले भजन ॥

बाद में प्यारे, पछताएगा जब,

पिंजरे से पंछी, निकल जाएगा जब,

पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥

ओ पापी मन, करले भजन ...

क्यों, करता है, मेरा मेरा ।

क्या, है तेरा, क्या है मेरा ॥

मुठी, बाँध के आया है, हाथ, पसारे जाएगा ।

जैसा, किया, कर्म तूने, वैसा, ही फल पाएगा ।

बाद में प्यारे, पछताएगा जब,

पिंजरे से पंछी, निकल जाएगा जब,

पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥

ओ पापी मन, करले भजन ...

भरी, जवानी, जी भर के सोया ।

आया, बुढ़ापा, जी भर के रोया ॥

प्रभु, की नजर से तूँ, बच नहीं पाएगा ।

आया, जो बुढ़ापा तो, थर थर कांपेगा ।

बाद में प्यारे, पछताएगा जब,

पिंजरे से पंछी, निकल जाएगा जब,

पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥

ओ पापी मन, करले भजन ...

पाया, मनुष्य तन, फिर क्यों, तूँ रोया ।

मोह, माया के, मद में, तूँ खोया ॥

सुंदर, जीवन, पाया है तो, प्रभु के गुण, गाए जा ।

अपने, जीवन, को प्यारे, भक्ति में लगाए जा ।

बाद में प्यारे, पछताएगा जब,

पिंजरे से पंछी, निकल जाएगा जब,

पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥

ओ पापी मन, करले भजन ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।