माँ के दर जो आया, खाली कभी गया नहीं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ के दर जो आया, खाली कभी गया नहीं

सच्चे मन से जो भी बोला, अनसुना कभी हुआ नहीं

माँ के दर जो आया, खाली कभी गया नहीं

सच्चे मन से जो भी बोला, अनसुना कभी हुआ नहीं

माँ तूने टूटे सपने जोड़ दिए, रोती आँख हँसा दी

हर अंधेरे रास्ते में, माँ तूने ज्योति जला दी

ना देखि मेरी औकात, ना पूछी पहचान

बस एक बार पुकारा, माँ तूने थाम लिया हाथ

माँ के दर जो आया, खाली कभी गया नहीं

सच्चे मन से जो भी बोला, अनसुना कभी हुआ नहीं

दुनिया ने जब मुँह मौड़ा, माँ तू साथ खड़ी थी

हर एक साँस में मेरी, माँ तेरी खुशबू बसी थी

ना धन माँगूँ, ना दौलत, ना सोना-चाँदी माँ

बस अपनी ममता का आँचल दे दे मेरी माँ

माँ के दर जो आया, खाली कभी गया नहीं

सच्चे मन से जो भी बोला, अनसुना कभी हुआ नहीं

बोलो… सच्ची है माँ?

सच्ची है माँ!

बोलो… प्यारी है माँ?

प्यारी है माँ!

जय माता दी! जय माता दी!

शेरावाली, ज्योतावाली, तू है महाकाली

भक्तों के दुख हरने वाली, तू ही रखवाली

जनम-जनम का नाता माँ, तुझसे जोड़ा है

तेरे दर पे जीना, तेरे दर पे मरना है

माँ के दर जो आया, खाली कभी गया नहीं

सच्चे मन से जो भी बोला, अनसुना कभी हुआ नहीं

माँ के दर जो आया, खाली कभी गया नहीं

सच्चे मन से जो भी बोला, अनसुना कभी हुआ नहीं

माँ के दर जो आया, खाली कभी गया नहीं

सच्चे मन से जो भी बोला, अनसुना कभी हुआ नहीं

जब तक साँस चले माँ, तेरा नाम रहे

इस दुनिया में बस माँ, तेरा काम रहे

बोलो…

जय माता दी! जय माता दी!

जय माता दी! जय माता दी!

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।