तेरा दर लगे मुझे प्यारा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरा दर लागे मुझे प्यारा,

झूठा सारा संसार रे…

माँ तेरे नाम की मस्ती छाई,

डोले मन हर बार रे…

तेरा दर लागे मुझे प्यारा,

झूठा सारा संसार रे…

चरणों में रख ले माँ मुझको,

कर दे भव से पार रे…

जय अम्बे! जय अम्बे!

बोलो मैया जय अम्बे!

सारे दुःखड़े हरने वाली,

मेरी मैया जय अम्बे!

जब जब आई विपदा मुझ पर,

तूने थामा हाथ रे,

डूबी नैया पार लगाई,

बन के तू पतवार रे…

जिसने तेरा नाम लिया,

उसका बेड़ा पार रे…

तेरा दर लागे मुझे प्यारा,

झूठा सारा संसार रे…

दुर्गा बनके दानव मारे,

काली बन संहार करे,

शेर सवारी कर के मैया,

भक्तों का उद्धार करे…

तेरे नाम की गूँज से मैया,

काँपे झूठा संसार रे…

तेरा दर लागे मुझे प्यारा,

झूठा सारा संसार रे…

बोल सच्चे दरबार की जय!

बोल शेरावाली मैया की जय!

जो भी आया तेरे द्वार,

उसका बदला भाग्य हज़ार!

हाथ जोड़ के विनती मेरी,

रखियो सदा मुझे पास,

तेरे बिना कुछ भी ना माँगूँ,

तू ही मेरी हर आस…

तेरा दर लागे मुझे प्यारा,

झूठा सारा संसार रे…

तेरा दर लागे मुझे प्यारा,

झूठा सारा संसार रे…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।