मेरे बांकें बिहारी तुझे डुंडु कहां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरज़-मेरे बांकें बिहारी मेरे बांकें सनंम

छंद-बृज़ भुमि परिक्रमा के पत्थ पे,

तुम्हें ढुंढनें के लिए डेरा किया।

पर पाया पता कहीं भी नहीं,

दुख शोक ने आकर घेरा किया॥

बड़ी वैदना व्याकुलता इतनी,

तुमनें कभी ध्यान ना मेरा किया।

दिन रोत ही रोते अंधेरा किया,

फिर रोते ही रोते सवेरा किया॥

मेरे बांकें बिहारी तुझे डुंडु कहां,ये बता दे

मुझे तुं छुपा हैं जहां

मेरे बांकें बिहारी तुझे डुंडु कहां...

वृन्दावन में डुंडु,तुझे कुंजन में डुंडु

तूं इतना ना यार,अब मुझको सता

मेरे बांकें बिहारी तुझे डुंडु कहां,ये बता दे

मुझे तूं छुपा हैं जहां

मेरे बांकें बिहारी तुझे डुंडु कहां...

तुझे गोकुल में डुंडु,तुझे गलियों में में डुंडु

धरती पे‌ हो श,या हो आसमां

मेरे बांकें बिहारी तुझे डुंडु कहां,ये बता दे

मुझे तूं छुपा हैं जहां

मेरे बांकें बिहारी तुझे डुंडु कहां...

पागल बना डोले,धसका तेरे लिए

कोई ना बताये,फिर भी तेरा पता

ये बात दे मुझे तूं छुपा हैं जहां

मेरे बांकें बिहारी तुझे डुंडु कहां...

बाबा धसका पागल पानीपत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।