यहाँ अत्याचार कितना क्या तुम नहीं जानते

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॥ पावन पाठ ॥

भजन : यहाँ अत्याचार कितना क्या तुम नहीं जानते ।

यहाँ अत्याचार कितना, क्या तुम नहीं जानते ?

प्रभू रुक नहीं सकता, तुम्हारे बिना ॥

सुना है प्रभू सबके, हरते हो गम ।

दुःखियों के कष्टों को, करते हो कम ॥

तुम बिन हरे दुःख मेरा, कौन ये बताऽ ।

यहाँ अन्धकार कितना, क्या तुम नहीं जानते ?

प्रभू रुक नहीं सकता, तुम्हारे बिना ॥

कहते धरम के खातिर, लेता जनम ।

गो-द्विज-भक्त के, हरता हूँ गम ॥

फिर क्यों नहीं आते हो ? ये तो बताऽ ।

मचा हाहाकार कितना, क्या तुम नहीं जानते ?

प्रभू रुक नहीं सकता, तुम्हारे बिना ॥

प्रभू तंग करते हैं, पापी सदा ।

प्रभू आओ ले करके, चक्र-गदा ॥

कान्त की सुनलो प्रभु जी, अब ना सता ।

यहाँ दुराचार कितना, क्या तुम नहीं जानते ?

प्रभू रुक नहीं सकता, तुम्हारे बिना ॥

भजन रचना : प. पू. श्री श्रीकान्त दास जी महाराज ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।