भजो राम सीता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन राम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भजो राम सीता

भजो, राम सीता, भजो, राम सीता ॥

गोकुल, में भागवत, मथुरा में गीता ।

भजो, राम सीता, भजो, राम...

चौदह, बर्ष, बनवास बिताया ।

लँका, पति को, मार मिटाया

पंच वटी से, ले आए सीता ।

भजो, राम सीता, भजो, राम...

जब जब, धर्म की, होती हानि ।

मानस के, चोले में, आए ब्रह्म ज्ञानी ॥

अर्जुन को, ज्ञान दे, सुनाई थी गीता ।

भजो, राम सीता, भजो, राम...

राम भी, तुम हो, श्याम भी, तुम हो ।

भगवन, मुक्ति का, धाम भी तुम हो ॥

भक्तों, का तुमने, सदा मन है जीता ।

भजो, राम सीता, भजो, राम...

अब, कलयुग के, नाम खिवईया ।

नाम, सुमिर के, पार हो नईया ॥

भजन, बिना जीवन, व्यर्थ काहे बीता ।

भजो, राम सीता, भजो, राम...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।