कान्हा रे कान्हा रे भक्ति तेरी साची

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा रे कान्हा रे भक्ति तेरी साची,

कैसे जाऊ दर छोड़ के,

तेरे हाथो में हैं मेरे मन की ड़ोरी,

ना तुने छोड़ी ना मेंने छोड़ी,

वापस जो जाऊंगा खिंचा चला आऊंगा,

ना जाऊं तेरी गली छोड़ के...

झूठा हैं ये जग सारा सच्चा नहीं,

तेरे बिना कुछ भी अच्छा नहीं,

मुश्किल है पाना तुझको मेंरे कान्हा,

फिर भी मनाऊं हाथ जोड़ के...

भक्ति में तेरी तन रंग लिया,

तन क्या है मेने मन रंग लिया,

अब चुप न रहना बस इतना कहना,

दूर मत जाना तू छोड़ के...

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

Bhajan Voice - Jay Prakash & Priya Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।