मेरे मोहन मेरे मोहन , मेरे मोहन मैं तेरी जोगन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मोहन , मेरे मोहन, मेरे मोहन , मैं तेरी जोगन,

जोगन मैं बन गई, तेरी भक्ति में खो गई,

छोड़ के सारी दुनिया को, मैं तेरी हो गई रे कन्हैया,

मेरे मोहन मेरे मोहन, मेरे मोहन मैं तेरी जोगन,

मोहन तेरी याद सताए, कैसे मैं रोकू खुद को,

रातो में उठ उठकर मैं, समझाऊ अपने दिल को,

दिल मेरा खो गया, बस तेरा हो गया,

बात न माने ये तो मेरी, ये तेरा हो गया रे कन्हैया,

मेरे मोहन मेरे मोहन, मेरे मोहन मैं तेरी जोगन,

निकली थी सोच के घर से, मोहन से मिल आऊंगी,

पल दो पल बात करूंगी, फिर वापस आ जाऊंगी,

पर तूने पकड़ी कलईया , ओ मेंरे साँवरिया,

छुड़ा सकी न मैं तो खुद को, मैं तेरी हो गई रे कन्हैया,

मेरे मोहन मेरे मोहन, मेरे मोहन मैं तेरी जोगन,

रंग लाया चोरी - चोरी , तुझसे ये मिलना मोहन,

ओरो की बात करू क्या, मैं बन गई तेरी जोगन,

जोगन मैं बन गई, बस तुझमे खो गई,

छोड़ के सारी दुनिया को, मैं तेरी हो गई रे कन्हैया,

मेरे मोहन मेरे मोहन, मेरे मोहन मैं तेरी जोगन,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

Bhajan Voice - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।