लक्ष्मी के पति जग के स्वामी

पारंपरिक
महादेव भजन विष्णु भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है

वो शिव सागर में सोते मिलेंगे

देखो लक्ष्मी के भाग खुल गए हैं

उनको विष्णुपति मिल गए हैं

जरा बैकुंठमें जा कर के देखो वह चक्र चलाते हैं मिलेंगे

लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है...

देखो सरस्वती के भाग खुल गए हैं

उन्हें ब्रह्मा पति मिल गए है

जरा बैकुंठ में जा कर के देखो वह तो वेद पढ़ाते मिलेंगे

लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है...

देखो गोरा के भाग खुल गए हैं

उन्हें भोला पति मिल गए हैं

हैं जरा कैलाश जा कर के देखो वह तो डमरू बजाते मिलेंगे

लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है...

देखो सीता के भाग खुल गए हैं

उन्हें रामा पति मिल गए हैं

जरा अयोध्या में जा कर के देखो वह तो धनुष चलाते मिलेंगे

लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है...

देखो राधा के भाग खुल गए हैं

उन्हें कान्हा पति मिल गए हैं

जरा मथुरा में जा कर के देखो वह तो बंसी बजाते मिलेंगे

लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है...

लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है

वो शिव सागर में सोते मिलेंगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।