इक वारी वृन्दावन जाणां पे गया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इक वारी वृन्दावन जाणां पे गया,

मैं तां मुड़ आई दिल औत्थे रह गया

इक वारी वृन्दावन जाणां पे गया...

मन्दिंर च लोकी अगे पिच्छे फिरदे,

राधे राधे कैंण मुहं च फुल खिड़दे

मैंनूं मिट्ठी वाणीं दा सवाद पे गया,मैं

तां मुड़ आई दिल औत्थे रह गया

इक वारी वृन्दावन जाणां पे गया,

मैं तां मुड़ आई दिल औत्थे रह गया

इक वारी वृन्दावन जाणां पे गया...

बांकें बिहारी जी दे भीड़ बड़ी,

मैं तां थक्क गई औत्थे लौकां च खड़ी

वजियां सी तालियां ते रोला पे गया

मैंनूं चड़ गई नाम ख़ुमारी,

लोकी कैन्दें रोला पे गया

वजियां सी तालियां ते रोला पे गया,

मैं तां मुड़ आई दिल औत्थे रह गया

इक वारी वृन्दावन जाणां पे गया,

मैं तां मुड़ आई दिल औत्थे रह गया

इक वारी वृन्दावन जाणां पे गया...

अख़ा नूं ख़ुमारी चड़ी नींद नस गई,

सांवरें दी सुरत मेरे नैंना वस गई

पुछदे ने लोकी श्याम की कह गया,

मैं तां मुड़ आई दिल औत्थे रह गया

इक वारी वृन्दावन जाणां पे गया,

मैं तां मुड़ आई दिल औत्थे रह गया

राधे राधे राधे राधे, राधे राधे राधे राधे

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।