मैं कश्मीर नहीं जाऊंगी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं कश्मीर नहीं जाउंगी मुझै जम्मू उतार दो

पहला संदेसा वैष्णो माँ का आया

कोई बहाना न मैंने बनाया,

वैष्णो मैया को चूनर ओढ़ाउंगी

मुझै कटरा उतार दो,

मैं कश्मीर नहीं जाउंगी मुझै जम्मू उतार दो

दूजा संदेसा माँ कालका का आया

कोई बहाना न मैंने बनाया,

काली मैया को खप्पर चढाउंगी

मुझै कलकत्ता उतार दो,

मैं कश्मीर नहीं जाउंगी मुझै जम्मू उतार दो

तीजा संदेसा माँ शारदा का आया

कोई बहाना न मैंने बनाया,

शारदा मैया को कंगन पहनाऊँगी

मुझे सतना उतार दो

मैं कश्मीर नहीं जाउंगी मुझै जम्मू उतार दो

चौथा संदेसा ब्रजेश्वरी माँ का आया

कोई बहाना न मैंने बनाया,

मैया को भेटे चढाउंगी

मुझे काँगड़ा उतार दो

मैं कश्मीर नहीं जाउंगी मुझै जम्मू उतार दो

पांचवा संदेसा मेरी अम्बे माँ का आया

कोई बहाना न मैंने बनाया,

अम्बे मैया को नारियल चढाउंगी

मुझे सूरत उतार दो

मैं कश्मीर नहीं जाउंगी मुझै जम्मू उतार दो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।