हरि काई लिखग थारा खाता म...

संत कबीर
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

दोहा

बुरे करम कमाई के, साईं दोष न देय।

जैसी करनी अपनी,तैसा ही फल लेय॥

हरि काई लिखग थारा खाता म,हरि काई लिखग थारा खाता म।

तुनह जीवन बितई दियो बाता म, तुनह जीवन बितई दियो बाता म॥

हरि काई लिखग...

धन दौलत अरू महल अटारी।2

कईनी जाना को थारा साथा म।

तुनाह जीवन बितई दियों...

भाई बंधु न थारो कुटुम्ब कबीलों।2

सब खईची लेगा रे अपना हाथा म॥

तुनह जीवन बितई दियो...

यम का दूत तुखह पकड़ी लई जासे।2

फिरी डंडा मारग थारा माथा म ॥

तुनह जीवन बितई दियो...

कहत कबीरा सुनो रे भाई साधो।2

ध्यान लगाओ विधाता म।

तुनह जीवन बितई दियो बाता म।

हरि काई लिखग थारा खाता म॥

॥डॉ.सजन सोलंकी॥

9111337188

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।