कैसे दर्शन पाऊँ ओ माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अश्रुधार भरी अँखियों में, कैसे दर्शन पाऊँ माँ,

मन मेरा संताप से भारी, कैसे मुस्का पाऊँ माँ।

अश्रुधार भरी अँखियों में, कैसे दर्शन पाऊँ माँ…॥

कदम-कदम पे बिछे हैं काँटे, राह में ऊँची खाई है,

दुख की बेड़ियाँ पाँव में पड़ती, किस विधि चलकर आऊँ माँ।

अश्रुधार भरी अँखियों में, कैसे दर्शन पाऊँ माँ…॥

सुख-दुख के इस भँवरजाल में, फँसी हुई मेरी नैय्या,

कभी डूबे, कभी उभरे, आज नहीं कोई खेवैया।

छूट गई पतवार भी हाथों से, पार कैसे जाऊँ माँ,

अश्रुधार भरी अँखियों में, कैसे दर्शन पाऊँ माँ…॥

पाप-पुण्य के फेर में फँसकर, मैंने सुध-बुध खोई माँ,

भीतर बैठी मेरी आत्मा, रोई है फ़ूट-फ़ूट रोई माँ।

बोल भी अब गले में अटके, आरती कैसे गाऊँ माँ,

अश्रुधार भरी अँखियों में, कैसे दर्शन पाऊँ माँ…॥

पाप-पुण्य का भेद बता दे, धर्म-कर्म का ज्ञान दे,

मेरे भीतर तू ही बसती, इतना मुझको भान दे।

फिर से मुझमें शक्ति जगा दे, फिर से नव-प्राण दे,

शिशु-सा गोद में खेल उठूँ, फिर बालक बन जाऊँ माँ।

किस विधि शब्द सजाकर बोलूँ, तुझको आज मनाऊँ माँ,

अश्रुधार भरी अँखियों में, कैसे दर्शन पाऊँ माँ…॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।