गौरां तेरा लाला निराला

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गौरां तेरा लाला निराला

धुन- दीदी तेरा देवर दीवाना

गौरां, तेरा, लाला निराला ॥

चौड़े, कान, लंबी, सूंड वाला ॥

मैंने, तो गौरां, मुकुट मंगवाया ।

मगर, तेरे लाला को, वोह भी ना भाया ॥

चंदन, उसको, लगता है प्यारा ।

चौड़े, कान, लंबी, सूंड वाला ।

गौरां, तेरा, लाला निराला...

मैंने, तो गौरां, माला मंगवाई ।

मगर, तेरे लाला को, वोह भी ना भाई ॥

कंठा, उसको, लगता है प्यारा ।

चौड़े, कान, लंबी, सूंड वाला ।

गौरां, तेरा, लाला निराला...

मैंने, तो गौरां, पेड़े मंगवाए ।

मगर, तेरे लाला को, वोह भी ना भाए ॥

मोदक, उसको, लगता है प्यारा ।

चौड़े, कान, लंबी, सूंड वाला ।

गौरां, तेरा, लाला निराला...

मैंने, तो गौरां, दूध मंगवाया ।

मगर, तेरे लाला को, वोह भी न भाया ॥

गंगाजल, लगता है प्यारा ।

चौड़े, कान, लंबी, सूंड वाला ।

गौरां, तेरा, लाला निराला...

मैंने, तो गौरां, मोटर मंगवाई

मगर, तेरे लाला को, वोह भी ना भाई ॥

मूषक, उसको, लगता है प्यारा ।

चौड़े, कान, लंबी, सूंड वाला ।

गौरां, तेरा, लाला निराला...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।