आनंद ही आनंद छाया

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

आनंद ही आनंद छाया

आनंद ही, आनंद छाया,

महाँराज, गजानंद आया ॥

महाँराज, गजानंद आया,

महाँराज, गजानंद आया ॥

आनंद ही, आनंद...

शीश, मुकुट धरे, माथे तिलक सजे ॥

तन, पे पीतांबर सजाया,

महाँराज, गजानंद आया ।

आनंद ही, आनंद...

गले, वैजयंती माला, माता गौरां के लाला ॥

मोदक, का भोग लगाया,

महाँराज, गजानंद आया ।

आनंद ही, आनंद...

तेरी, ज्योति जलाऊँ, तुझे भेंट चढ़ाऊँ ॥

भक्तों, ने मंगल गाया,

महाँराज, गजानंद आया ।

आनंद ही, आनंद...

तेरे, दर पे मैं आऊँ, आ के शीश झुकाऊँ ॥

बप्पा, अमृत, रस बरसाया,

महाँराज, गजानंद आया ।

आनंद ही, आनंद...

तेरा आसन लगाया, देवा फूलों से सजाया ॥

भक्तों ने, दर्शन पाया,

महाँराज, गजानंद आया ।

आनंद ही, आनंद...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।