हुई घर घर में जय जयकार रे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

हुई घर घर में जय जयकार रे

हुई, घर घर में, जय जयकार रे,

आया, गण पति का, त्योहार रे ॥

ऊँचा, आसन लगाओ,

उस पे, देवा बिठाओ ॥

तेरी, सेवा में, सारा संसार रे,

आया, गण पति का, त्योहार रे ॥

हुई, घर घर में, जय जयकार रे...

पहलें, चरण धुलाओ, दीया ज्योत जगाओ ॥

केसर, रौली का, तिलक लगाओ रे,

आया, गण पति का, त्योहार रे ॥

हुई, घर घर में, जय जयकार रे...

फ़ूल, माला चढ़ाओ,

लड्डू, भोग लगाओ ॥

रिद्धि, सिद्धि के, तुम करतार रे,

आया, गण पति का, त्योहार रे ॥

हुई, घर घर में, जय जयकार रे...

एक, दंत कहें, दयावन्त कहें ॥

आया, मूषक पे, हो के स्वर रे,

आया, गण पति का, त्योहार रे ॥

हुई, घर घर में, जय जयकार रे...

मन्नत, पूर्ण करो, सबकी, झोली भरो ॥

सारे, जग के, तुम भर्तार रे,

आया, गण पति का, त्योहार रे ॥

हुई, घर घर में, जय जयकार रे...

नाची, मन में उमंग,

भरा, खुशियों ने रंग ॥

गूंजी, गण पत, तेरी जयकार रे,

आया, गण पति का, त्योहार रे ॥

हुई, घर घर में, जय जयकार रे...

शंख, अंकुश लिए आए,

कमल, पाश लिए आए ॥

आए, मूषक पे, हो के सवार रे,

आया, गण पति का, त्योहार रे ॥

हुई, घर घर में, जय जयकार रे...

शिव, फूले ना समाए,

गौरां, वारी वारी जाए ॥

आए, जग के, पालनहार रे,

आया, गण पति का, त्योहार रे ॥

हुई, घर घर में, जय जयकार रे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।