तेरे दिल में रहेंगे ओ साँवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दिल में रहेंगे ओ साँवरे

( हमे, अपना, बना ले, ओ साँवरे,

तेरी, राहों में, खड़े हैं, ओ साँवरे ॥)

तेरे, दिल में, रहेंगे... ओ साँवरे ॥

तेरे, मन में, रहेंगे... ओ साँवरे ॥

तेरे, मन में, रहेंगे... ओ साँवरे ।

तेरे, दिल में, रहेंगे... ओ साँवरे...

तुम, दीपक बनो, हम ज्योति बनें ॥

मंदिर में, रहेंगे... ओ साँवरे ।

तेरे, दिल में, रहेंगे... ओ साँवरे...

तुम, भँवरा बनो, हम कली बनें ॥

बागों में, रहेंगे... ओ साँवरे ।

तेरे, दिल में, रहेंगे... ओ साँवरे...

तुम, माखन बनो, हम मिश्री बनें ॥

भोगों में, रहेंगे... ओ साँवरे ।

तेरे, दिल में, रहेंगे... ओ साँवरे...

तुम, चन्दा बनो, हम सूरज बनें ॥

अम्बर, में रहेंगे... ओ साँवरे ।

तेरे, दिल में, रहेंगे... ओ साँवरे...

तुम, गंगा बनो, हम यमुना बनें ॥

सरयू में, रहेंगे... ओ साँवरे ।

तेरे, दिल में, रहेंगे... ओ साँवरे...

तुम, ढोलक बनो, हम मंजीरा बनें ॥

भजनों में, रहेंगे... ओ साँवरे ।

तेरे, दिल में, रहेंगे... ओ साँवरे...

तुम, चंदन बनो, हम पानी बनें ॥

मस्तक पे, रहेंगे... ओ साँवरे ।

तेरे, दिल में, रहेंगे... ओ साँवरे...

तुम, फ़ूल बनो, हम धागा बनें ॥

माला में, रहेंगे... ओ साँवरे ।

तेरे, दिल में, रहेंगे... ओ साँवरे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।