कहां हो तुम चले आओ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कहां हो तुम चले आओ,मोहब्बत का तकाज़ा है

ग़में दुनिया से घबराकर,तुम्हें दिल ने पुकारा है

तुम्हारी बैरूख़ी इक दिन,हमारी जांन ले लेगी

कसम तुमको ज़रा सोचो,के दसतुरे वफ़ा क्या है

ग़में दुनिया से घबराकर,तुम्हें दिल ने पुकारा है

कहां हो तुम चले आओ,मोहब्बत का तकाज़ा है

ग़में दुनिया से घबराकर,तुम्हें दिल ने पुकारा है

कहां हो तुम...

ना जानें किस लिए दुनिया की नज़रें,‌फ़िर गई हमसे

तुम्हें देखा तुम्हें चाहा,कसूर इसके सिवा क्या है

ग़में दुनिया से घबराकर,तुम्हें दिल ने पुकारा है

कहां हो तुम चले आओ,मोहब्बत का तकाज़ा है

ग़में दुनिया से घबराकर,तुम्हें दिल ने पुकारा है

कहां हो तुम...

ना है फ़रियाद होटों पर,ना आंखों में कोई आसूं

ज़माने से मिला जो ग़म,उसे गीतों में गाया है

ग़में दुनिया से घबराकर,तुम्हें दिल ने पुकारा है

कहां हो तुम चले आओ,मोहब्बत का तकाज़ा है

ग़में दुनिया से घबराकर,तुम्हें दिल ने पुकारा है

कहां हो तुम...

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-720652600

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।