कुछ ऐसा जतन कर कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कुछ ऐसा जतन कर कान्हा...

कुछ ऐसा जतन कर कान्हा मै तेरी हो जाऊं

छोड़ जगत जंजाल मैं बस तेरी हो जाऊं

छोड़ जगत जंजाल मैं बस तेरी हो जाऊं

नहीं लुभाती दुनियादारी, व्यर्थ है घर संसार

तू ही है इक सच्चा मोहन, बाकी सब बेकार

नहीं लुभाती दुनियादारी, व्यर्थ है घर संसार

तू ही है इक सच्चा मोहन, बाकी सब बेकार

पाना है तुझको बता दे, किस विध तूझको पाऊं

छोड़ जगत जंजाल मैं बस तेरी हो जाऊं

झूठे है ये रिश्ते नाते, मोह माया के धागे

तेरा मेरा करते करते, जीवन सरपट भागे

झूठे है ये रिश्ते नाते, मोह माया के धागे

तेरा मेरा करते करते, जीवन सरपट भागे

तुझ संग प्रीत निभानी बोलो कैसे प्रभु निभाऊं

छोड़ जगत जंजाल मैं बस तेरी हो जाऊं

देखूं तो बस तुझको देखूं, सोचूं तो बस तुझको

तेरी ही होकर रह जाऊं, ऐसी गति दे मुझको

देखूं तो बस तुझको देखूं, सोचूं तो बस तुझको

तेरी ही होकर रह जाऊं, ऐसी गति दे मुझको

अंत समय बाहों में तेरी, गहरी नींद समाऊं

छोड़ जगत जंजाल मैं बस तेरी हो जाऊं

कुछ ऐसा जतन कर कान्हा, मैं तेरी हो जाऊं

छोड़ जगत जंजाल मैं बस तेरी हो जाऊं

छोड़ जगत जंजाल मैं बस तेरी हो जाऊं

छोड़ जगत जंजाल मैं बस तेरी हो जाऊं

गायिका एवं रचना रंजना गुंजन

संगीत सकल देव साहनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।