मैं नारायण घर ले आई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं नारायण घर ले आई

अब मुझे किसी की कमी नहीं

अब धन दौलत की कमी नहीं

माया का सागर गहरा है

और मुझे तैरना आता नहीं

नैया का नाम कन्हैया है

डूबे तो कोई फिक्र नहीं

मैं नारायण घर ले आई...

घनघोर अंधेरा इस जग में

मैं बुझा दीप इस बाती का

सूरज को मना कर ले आई

अब अंधियारे की फिक्र नहीं

मैं नारायण घर ले आई...

खिड़की दरवाजे खोल दिए

सारा सामान नीलाम हुआ

आना-जाना आसान हुआ

ताले चाबी की फिक्र नहीं

मैं नारायण घर ले आई...

घर से था मंदिर बहुत ही दूर

पैरों में मेरे प्राण नहीं

जब घर में प्रभु जी आ बैठे

तीरथ जाने की फिक्र नहीं

मैं नारायण घर ले आई...

मैं नारायण घर ले आई

अब मुझे किसी की कमी नहीं

अब धन दौलत की कमी नहीं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।