काशी वाले से मिलना बड़ा जरूरी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

काशी वाले से मिलना बड़ा जरूरी

ओ काशी, वाले से, मिलना, बड़ा जरूरी ।

ओ डमरू, वाले से, मिलना, बड़ा जरूरी ॥

मिलना, बड़ा जरूरी ओ भोले,

मिलना, बड़ा जरूरी ॥

ओ काशी, वाले से, मिलना, बड़ा...

जो मैं, होती, पवन बंसती, झोंका बन कर आती ।

जो मैं, होती, गंगा यमुना, नित तुमको नहलाती ॥

बन ना, सकी मैं, गंगा यमुना ॥ये मेरी मज़बूरी,

ओ काशी, वाले से, मिलना, बड़ा...

जो मैं, होती, तेरी पुजारिन, तेरे मंदिर आती ।

जो मैं, होती, उज्जैन नगरिया, तेरा दर्शन पाती ।

बन ना, सकी मैं, उज्जैन नगरिया ॥ये मेरी मज़बूरी,

ओ काशी, वाले से, मिलना, बड़ा...

जो मैं, तेरा, पता जानती, ख़त लिख के भिजवाती ।

सब, भक्तों को, संग में ले के, तुमसे मिलने आती ॥

पता, तेरा मेरे, पास नहीं ॥ये मेरी मज़बूरी,

ओ काशी, वाले से, मिलना, बड़ा...

जो मैं, होती, काली बदरिया, छम छम नीर बहाती ।

गरज़ गरज़ के, बरस बरस के, नित तुम को नहलाती ॥

बन ना, सकी मैं, कारी बदरिया ॥ये मेरी मज़बूरी,

ओ काशी, वाले से, मिलना, बड़ा...

जो मैं, होती, पास तुम्हारे, झूम झूम कर गाती ।

हाथ, पकड़ कर, तुमको भोले, मन के भाव सुनाती ॥

मेरी तो, मज़बूरी ये भोले ॥तेरी क्या मज़बूरी,

ओ काशी, वाले से, मिलना, बड़ा...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।