ला बने बेड़े डूबदे नू

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज: पीढ तेरे जान दी किदा जरागा मैं (गुरदास मान)

ला बने बेड़े डूबदे नू कर पार दातीये

बेमौत मैं गरीब नू ना मार दातीये

बेमौत मैं गरीब नू ना मार दातीये

ला बने बेड़े...

जिन्ना दे वासते सी मैं तेनु भुला लिया

अज़ ओहना सारया तो मैं धोखा ही खा लिया

सभ तूर गए ने छोड़ के मझधार दातीये

बेमौत मैं गरीब नू ना मार दातीये

ला बने बेड़े...

कुरला रिहा है दिल मेरा रौंदे ने नैन मां

या जिंदगी नू मौत दे या दिल नू चैन मां

कर दे तू मेरा फैसला इक वार दातीये

बेमौत मैं गरीब नू ना मार दातीये

ला बने बेड़े...

टकरार किता दुनिया ने संसार रूस गया

विपदा दा वेला वेख के हर यार रूस गया

तू वी ना मेरे नाल मां टकरार दातीये

बेमौत मैं गरीब नू ना मार दातीये

ला बने बेड़े...

ना होर दर बदर दिया मैनू ठोकरा दे मां

पापी कमल नू चरना दा इक आसरा दे मां

आया तेरी शरण च मां दे दे प्यार दातीये

बेमौत मैं गरीब नू ना मार दातीये

ला बने बेड़े...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।