जय कृष्ण माधव नन्दनन्दन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय कृष्ण माधव नन्द-नन्दन,

मैं करूँ तेरी वन्दना ।

जय-जय मुरारी-कृष्ण-केशव,

कर रहा तेरी अर्चना॥

योग जप-तप कछु न जानूँ ,

क्या करूँ तेरी साधना ?

हे कृपानिधि ! दीन रक्षक !

सब हरो मेरी वासना ॥

मम हृदय में भक्ति भर दो,

बस यही है कामना ।

जग के माया मोह हरलो,

और कोई चाह ना ॥

जग के सब दुख दर्द देना,

पर प्रभु दो कामना ।

हो दयानिधि भक्त वत्सल,

तो तू पार उतारना ॥

तव पद कमल मकरन्द का,

मैं भ्रमर बनना चाहता ।

लो शरण में इस कान्त को,

यह दीन होकर याचता ॥

दोहा :

मुझ दीन हीन अनाथ पे,

कृपा करो हे ईश ।

भक्ति-भाव हिय में भरो,

दया करो जगदीश ॥1 ॥

शरणागत यह कान्त है,

कर जोरे है नाथ ।

सत्यमार्ग पे वह चले,

छूटे ना तव साथ ॥2 ॥

भजन रचना : प• पू• श्री श्रीकान्त दास जी महाराज ।

स्वर एवं संगीत : प्रवीण सिंह जी ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।