आया हु जग से हार मुझको अपनाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आया हु जग से हार मुझको अपनाले

मेरी हार को कर स्वीकार मुझको अपनाले

दर तेरा आखरी है दुनिया बताती है

बिगड़ी से बिगड़ी किस्मत यहां बन जाती है

सच्ची है तेरी सरकार मुझको अपना ले

संकटों में उलझा मेरा हर एक रिश्ता है

इससे उबारने का तू ही एक फरिस्ता है

संकट मूझपे है हजार मुझको अपना ले

कोई कहे साथी माझी कोई दीनानाथ है

श्याम कहे बाबा मेरे कोई न साथ है

देकर थोड़ा सा प्यार मुझको अपना ले

लेखक श्याम अग्रवाल जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।