नर से नारी बने हैं गौरां के पिया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नर से नारी बने हैं गौरां के पिया

नर से, नारी बने हैं, गौरां के पिया ॥

माथे, पे बिंदिया, माथे, पे टीका ॥

लम्बा, घूँघट डाले, गौरां के पिया ।

नर से, नारी बने हैं, गौरां के...

आँखों, में कज़रा, वालों में गज़रा ॥

जटा से, गंगा बहाए, गौरां के पिया ।

नर से, नारी बने हैं, गौरां के...

कानों, में कुण्डल, नाक में नथुनियाँ ॥

गले में, पहने हरवा, गौरां के पिया ।

नर से, नारी बने हैं, गौरां के...

हाथों, में चूड़ियाँ, हाथों में कँगना ॥

लाल, मेंहदी लगाए, गौरां के पिया ।

नर से, नारी बने हैं, गौरां के...

पैरों, में पायल, घुँघरू जड़े हैं ॥

महावर, लाल लगाए, गौरां के पिया ।

नर से, नारी बने हैं, गौरां के...

अंगों, में साडी, अंगों में लंहगा ॥

चुनरी, लाल हैं ओढ़े, गौरां के पिया ।

नर से, नारी बने हैं, गौरां के...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।